कोटक महिंद्रा बैंक मामले बिचौलिया गिरफ्तार; दो बैंक खातों से मिली 60 करोड़ की रकम आगे ट्रांसफर की; रिलेशनशिप मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद देर रात एक्शन

कोटक महिंद्रा बैंक मामले बिचौलिया गिरफ्तार; दो बैंक खातों से मिली 60 करोड़ की रकम आगे ट्रांसफर की; रिलेशनशिप मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद देर रात एक्शन

Kotak Mahindra Bank Fraud

Kotak Mahindra Bank Fraud

अर्थ प्रकाश आदित्य शर्मा
पंचकूल, 26 मार्च। Kotak Mahindra Bank Fraud: 
राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। गुरुवार देर रात को ब्यूरो की टीम ने कोटक महिंद्रा बैंक मामले में आरोपी रजत डहरा को गिरफ़्तार कर लिया। उसने खुलासा किया है कि उसे 29 मई 2020 से बैंक अकाउंट 3031 और 1 अक्टूबर 2022 से 2025 तक एक अन्य बैंक खाता नंबर 9112 से 60 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम मिली। आरोप है कि उसने यह पैसा कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया, जिनकी जांच की जा रही है। ब्यूरो की जांच में इससे पहले रिलेशनशिप मैनेजर के अलावा रजत भी शामिल पाया गया, जिसके खाते में, कोटक महिंद्रा बैंक में स्थानीय नगर निगम की फिक्स्ड डिपॉज़िट से जुड़े 145 करोड़ रुपये के घोटाले के सिलसिले में, करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए थे। उसकी इस मामले के मुख्य आरोपी के साथ सक्रिय संलिप्तता पाई गई है। एसीबी ने देररात पंचकूला सिविल अस्पताल में मेडिकल जांच के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

वहीं, गिरफ्तार आरोपी दिलीप कुमार राघव (जो कोटक महिंद्रा बैंक, सेक्टर 11 में रिलेशनशिप मैनेजर है) को दिन के समय एक स्थानीय अदालत ने एसीबी की हिरासत में चार दिन के रिमांड पर भेज दिया। एजेंसी ने सात दिन की रिमांड मांगी थी। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील गुरसिमर सिंह ने इसका विरोध करते हुए गिरफ्तारी को अवैध बताया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी को गिरफ्तारी के 24 घंटे बाद अदालत के सामने पेश किया गया था।

एसीबी ने जांच के दौरान कोर्ट को बताया कि पुलिस ने बैंक और नगर निगम, दोनों जगहों से बैंक खातों के सर्टिफाइड स्टेटमेंट और संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। जुटाए गए सबूतों के आधार पर, आरोपी राघव को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी ने तथ्यों का पूरी तरह से खुलासा नहीं किया है और उस पर अहम जानकारी छिपाने का शक है। एसीबी की योजना है कि वह आरोपी से कई खातों में हुए लेन-देन, अन्य अधिकारियों की भूमिका, और बैंक कर्मचारियों व निजी व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता के बारे में विस्तार से पूछताछ की जा सकेगी।

जांच का फोकस कथित तौर पर जाली दस्तावेज़ों पर भी रहेगा, जिनमें पत्र, वाउचर और नकली मुहरें शामिल हैं। पुलिस को एक बड़ी साजिश का शक है और वह उन जगहों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जहां इस योजना को अंजाम दिया गया था, साथ ही वह आरोपी दिलीप के पैतृक स्थान कासगंज, उत्तर प्रदेश - में कथित तौर पर रखे गए आपत्तिजनक दस्तावेज़ों को भी बरामद करना चाहती है।